ओ नारी
तू है शेरनी
बस भूल गयी है तू
अपना अस्तित्व
तेरे आगे क्या बिसात
इन भेड़ियों की
क्या औकात
तू टूट पड़
बन रणचंडी
कर दे कुत्ते को
तार-तार
तू उठ पहले
तुझे देख कर
होंगी प्रेरित
बहनें सारी
बना दे उनको भी
शेरनी
ओ नारी
तू है शेरनी
सचिन पी पुरवार
समर्पित श्री चरणों में मेरी चंद पंक्तियाँ

इस शुभ दिन तुम, कर लो ये प्रण, हाथ में लेकर पानी को,
फटने में बस दिन लगते थे एक दो या फिर तीन चार,
जन जीवन में त्राहि त्राहि है सबके कष्ट मिटाओ देवा
अब एक कविता तो बनती ही है न
पंजे की सरकार में नेता सब बेकार
तेरे गाल गाल तेरे होंठ-होंठ

यूँ तन्हा वक़्त गुजरने से क्या मिलता है
तूने तो कुछ कर दिया वाह ! वाह !
कुछ असर प्यार का है तुझपे
प्रातः काल का मनोरम द्रश्य कितना लुभावना होता है , वातावरण कितना सुन्दर एवं प्रदुषण रहित होता है , तो क्यों न हम इस सुन्दर सवेरा का लुत्फ़ उठायें ......
देखिये पंक्षी भी सुबह सैर को निकल पड़े ......
आओ टहलने चलें ताकि सुबह की ताज़ी वायु हमारे फेफड़ो में पहुँच कर हमरे रक्त एवं मन को शीतलता प्रदान करे
भोर बही उठ जाओ मित्रों ♥
खूब सो लिए आओ मित्रों ♥
मेरे संग अब सैर भी कर लो ♥
प्रातः काल आनंद से भर लो ♥
इतना शुद्ध समय होता ये ♥
सारे दिन ना रहता है ♥
रहना स्वस्थ अगर है मित्रों ♥
बात मान लो मेरी ये ...... ♥
आप का दिन शुभ हो
तू चंचल मस्त जवानी से
लाल साड़ी में यूँ खुले आम कहाँ चल दिए
तू बोल तुझे वो लाकर दूँ
पर परतें खुलीं तो वाह भाई वाह मैं पूर्ण रूप से हुआ था दंग
जब प्यार के दिनों की होती है शुरुआत
सिलसिले मिटने न पायें ऐ खुदा नेमत तू कर
ऐ खुदा इतनी गुज़ारिश वो सदा यूँ पाक हो![]() |
| B'day gal Shubhi |